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रणवीर-दीपिका शादी के लिए मुंबई से 6 हजार किमी दूर 10 हजार साल पुरानी इस जगह पर पहुंचे, इसी आलीशान महल में होगा वेडिंग सेलिब्रेशन; रोचक है इस जगह का इतिहास

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रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण शादी के लिए शुक्रवार रात को इटली रवाना हुए. दोनों मुंबई एयरपोर्ट पर व्हाइट कॉम्बिनेशन ड्रेस में दिखाई दिए थे. मीडिया रिपोर्ट्स और करीबी सूत्रों के मुताबिक शादी इटली के लेक कोमो में होगी। शादी की तारीख 14 और 15 नवंबर है. आपको बता दें कि दोनों बीते 5 साल से रिलेशनशिप में हैं.

शादी की डेट की थी शेयर

रणवीर-दीपिका ने 21 अक्टूबर को अपनी शादी की डेट शेयर करते हुए लिखा था, “हमें आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमारे परिवार के आशीर्वाद से हमारी शादी 14 और 15 नवंबर 2018 को होगी.

इतने सालों में आपने हमें जो प्यार और स्नेह दिया है, उसके लिए हम आपके आभारी हैं और हमारे शुरू होने वाले प्रेम, दोस्ती और विश्वास के इस खूबसूरत सफर के लिए हम आपके आशीर्वाद की कामना करते हैं। बहुत सारा प्यार, दीपिका और रणवीर।”

अब नई खबर के मुताबिक रणवीर और दीपिका अपनी शादी के लिए इटली रवाना हो चुके हैं. जिन लोगो को नहीं पता उन्हें बता दे कि ये दोनों अपनी शादी इटली के लेक कोमो नाम की जगह पर करने जा रहे हैं. सूत्रों की माने तो यहाँ पर इनकी शादी एक डेल बालडियानेलो नाम के आलिशान महल में होगी. ये महल इटली में काफी फेमस हैं और अपनी शानदार ब्यूटी के लिए जाना जाता हैं.

10 हजार साल पुराना लेक

लेक कोमो करीब 10 हजार साल पुराना है। इस लेक का आकार अंग्रेजी के लेटर ‘Y’ के जैसा है। इसे ये आकार ग्लेशियर मूमेंट के चलते मिला था। इस लेक में अड्डा नदी का बर्फीला पानी आता है। ये इटली की तीसरी सबसे बड़ी लेक है। जो 146 स्क्वेयर किलोमीटर में फैली है। इसकी गहराई करीब 1300 फीट है। अपनी नेचुरल ब्यूटी के चलते रोमन काल से ही यह जगह पर्यटकों की पसंदीदा रही है। लेक कोमो के आसपास बसे गांवों में बने रंग-बिरंगे घर और यहां का गॉथिक आर्किटेक्चर इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ाता है.

रोमन ने शुरू किया डेवलपमेंट

लेक कोमो का संबंध कई जातियों से रहा है, लेकिन रोमन कब्जे के बाद इस लेक का महत्व बढ़ गया। रोमनों ने रेजिना के रास्ते इसका निर्माण किया है, जो इस लेक के पश्चिमी किनारे की दो मुख्य सड़कों में से एक है। रोमन सम्राट और सैन्य नेता ऑगस्टस ने लेक कोमो का इस्तेमाल पो और राइन वैलीज में बिजनेस के लिए किया।

जब बदल दिया गया इसका नाम

49 ईसा पूर्व कोमो शहर में जूलियस सीजर ने 5000 लोगों के साथ शासन शुरू किया था। उसने इस झील का नाम बदलकर लारियस रख दिया। इस नाम को झील के कई गानों में आज भी सुना जा सकता है। कोमो को ‘नोवम कॉमम’ के नाम से भी जाना जाता था। उन दिनों ‘मजिस्ट्ररी कोमासिनी’ (बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर नया आकार देना) से यूरोप का विकास किया गया। रोमन शासन काल में कोमो का विकास तेजी से हुआ

इन दो चीजों के लिए भी फेमस

सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान कोमो के पर्यटन में गिरावट आई थी। उस वक्त इस लेक के उत्तरी छोर के डोंगो पर मुसोलिनी ने कब्जा कर लिया था। हालांकि, अब ये दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक या यूं कहें नंबर वन है। कोमो रेशम इंडस्ट्री के लिए दुनियाभर में फेमस है। यहां दुनियाभर से लोग रेशम फेब्रिक डिजाइन, प्रिटिंग जैसी कला को सीखने आते हैं। रेशम के साथ ये फर्नीचर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। विला एर्बा में वर्ल्ड फेमस एग्जीबिशन सेंटर भी है।

ऐसे करें लेक कोमो का सफर

इंडिया से इटली के लेक कोमो जाने के लिए फ्लाइट लेना होगी। फ्लाइट दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु या अन्य शहरों में से भी मिल जाती है। ये फ्लाइट आपको इटली के मिलान एयरपोर्ट के लिए लेना होती है। यहां से लेक कोमो की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। मिलान से कोमो के लिए ट्रेन और सड़क दोनों से जा सकते हैं। बता दें कि मुंबई से लेक कोमो करीब 6 हजार किमी दूर है।

सितंबर है जाने का बेस्ट टाइम

लेक कोमो में घूमने का बेस्ट टाइम मई से सितंबर के बीच होता है। जुलाई और अगस्त यहां हॉटेस्ट मंथ होते हैं, क्योंकि इस दौरान एवरेज टेम्प्रेचर 22 डिग्री के करीब होता है. कई बार यहां टेम्प्रेचर 35 डिग्री तक पहुंच जाता है, इसलिए जाने से पहले एसी अकोमोडेशन में बुकिंग आप देख सकते हैं.