Home SHEHANSHAH IAS अवनीश ने कहा-कम नंबरों से निराश ना हो बच्चे, मेरे भी...

IAS अवनीश ने कहा-कम नंबरों से निराश ना हो बच्चे, मेरे भी 10वीं में सिर्फ 45% आए थे

15

New Delhi : परीक्षा में नंबर कम आना या फिर फेल हो जाना यह आपकी काबीलियत को नहीं बताता। यह महज के एक नंबर गेम है। आपके अंदर छिपी काबीलियत आपको आगे कई बेहतरीन मौके देती है। करीब दो साल पहले बेटी को प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने और उसके साथ मिड डे मील खाने को लेकर चर्चा में आए प्रदेश के IAS अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने अब फेसबुक पर अपनी मार्क्सशीट साझा करते हुए यह बातें लिखी हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद फेल होने पर रायगढ़ में 18 वर्षीय एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी।

कबीरधाम जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण 2009 बैच के IASअधिकारी हैं। 10 मई को परीक्षा परिणाम आने और 11 मई को छात्र के आत्महत्या की खबर पढ़कर उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “आज मैंने अखबार में एक चौंकाने वाली खबर पढ़ी कि एक छात्र ने परीक्षा में फेल हो जाने के कारण आत्महत्या कर ली। मैं सभी छात्रों और उनके माता-पिता से अपील करता हूं कि वे परिणाम को गंभीरता से न लें। यह एक नंबर गेम है। आपको अपने कैलिबर को साबित करने के कई और मौके मिलेंगे।”

छात्रों को मोटिवेट करने के उद्देयश्य से IASअफसर ने अपनी कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं, कॉलेज के नंबर भी फेसबुक पर शेयर किए। उन्होंने कक्षा 10वीं में 44.5 फीसदी, 12वीं की परीक्षा में 65 % और स्नातक में 60.7 % नंबर हासिल किए थे। अफसर ने अपने संदेश में यह भी बताया है कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा 1996 में, 12वीं की परीक्षा 1998 और स्नातक की डिग्री साल 2002 में पूरी की थी। भले ही अवनीश कुमार शरण के नंबर कम आए हों, लेकिन उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर दिखा दिया कि काबिलियत नंबर देखकर नहीं मापी जा सकती।

वर्ष 2017 में पहली बार IASअवनीश कुमार शरण चर्चा में आए थे। बलरामपुर के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने बेटी वेदिका का दाखिला सरकारी स्कूल प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में कराया था। जहां वे उससे अक्सर मिलने जाते थे। वहां पर बेटी के साथ मिड डे मील खाते उनकी फोटो काफी वायरल हुई थी। उनका मानना है कि हमें सरकारी संस्थाओं में यकीन करना चाहिए तभी उनकी हालत सुधर सकती है। इसके पहले उन्होंने वेदिका को आंगनबाड़ी भी भेजा था।

दरअससल IASअधिकारी अवनीश शरण का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके घर में बिजली की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव के रहने वाले IASअवनीश के पिता और दादाजी भी शिक्षक थे। अवनीश कहते हैं कि हमें एक जिंदगी मिलती है और जितना हो सके अच्छे काम करते रहने चाहिए।